पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः ।
वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च ॥

|| ભગવદ ગીતા ૯ / ૧૭ ||

भावार्थ :
इस संपूर्ण जगत्‌ का धाता अर्थात्‌ धारण करने वाला एवं कर्मों के फल को देने वाला, पिता, माता, पितामह, जानने योग्य, (गीता अध्याय 13 श्लोक 12 से 17 तक में देखना चाहिए) पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ ॥17॥

હે પરમ પિતા અમને તેવી કુશાગ્ર બુદ્ધિ આપ કે જેથી અમે તને અને તારા કાર્યને સમજી શકીએ.

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