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सबसे उँची विजय पताका
सबसे उँची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा।
मानवता का मानबिन्दु यह भारत सबसे बडा रहेगा॥

विन्ध्या की चट्टानों पर रेवा की यह गति तूफानी
शत शत वर्षो तक गायेगी जीवन की संघर्ष कहानी
इसके चरणों में नत होकर हिन्दु महोदधि पडा रहेगा
भारत सबसे बड़ा रहेगा ॥१॥

गंगा यमुना घट से निकलीं जहां एक होकर बहने को
जहाँ प्रकृति के पास रहा है सदा पुरुष से कुछ कहने को
उस भारत में पराक्रमों का प्यारा झंडा गड़ा रहेगा
भारत सबसे बडा रहेगा ॥२॥

जिसकी मिट्टी में पारस है स्वर्ण-धूलि उस बंग भूमि की
पंचनदो के फव्वारों से सिंची बहारें पूण्य-भूमि की।
शीर्ष-बिन्दु श्रीनगर सिन्धु तक सेतुबन्धु भी अड़ा रहेगा
भारत सबसे बड़ा रहेगा ॥३॥

जिस धरती पर चन्दा-सूरज साँझ-सकारे नमन चढ़ाते
षड्‌-ऋतु के सरगम पर पंछी दीपक और मल्हार सुनाते।
वही देश-मणि माँ-वसुधा के ह्नदय-हार में जड़ा रहेगा
भारत सबसे बड़ा रहेगा ॥४॥